विनोद नेताम वरिष्ठ पत्रकार

छत्तीसगढ़/विशेष रिपोर्ट

29 गौधाम का उद्घाटन, 1460 का लक्ष्य लेकिन सवाल वही… जमीन पर कब दिखेगा असर? वैसे भी भारतीय जनता पार्टी के फूल छाप कमल भैय्यों की सरकार पर गौ मांस बेंचने वाली कंपनियों से चंदा लेकर चंदे के पैसे को अनपचक होने तक हजम करने की जानकारी जग जाहिर हो चुकी है।हालांकि छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार इस मामले में पुरी तरह से पाक साफ है क्योंकि छत्तीसगढ़ के अंदर में एक भी कत्ल खाना मौजूद नहीं है। बावजूद इसके गौ तस्करी और गौ सेवा के नाम पर दादागिरी का आलम चरम पर है।
छत्तीसगढ़ में एक बार फिर गाय और गौ सेवा को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 29 गौधामों का उद्घाटन कर राज्य में गौधाम योजना की शुरुआत कर दी है। सरकार का दावा है कि पहले चरण में 152 गौधाम बनाए जाएंगे और आगे चलकर प्रदेश भर में कुल 1460 गौधाम स्थापित किए जाएंगे।
सरकार इसे गौवंश संरक्षण और किसानों की राहत का बड़ा कदम बता रही है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तीखे सवाल उठने लगे हैं।
क्या है गौधाम योजना?
घुमंतू एवं निराश्रित गौवंश के लिए स्थाई आश्रय।
पहले चरण में 152 गौधाम निर्माण
प्रदेश में कुल 1460 गौधाम बनाने का लक्ष्य।
सड़कों और खेतों से आवारा पशुओं को हटाने का दावा
पहले कांग्रेस, अब भाजपा,गाय पर सियासत जारी
छत्तीसगढ़ में गौ सेवा का मुद्दा पहले भी राजनीति के केंद्र में रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने नरवा-गरवा-घुरवा-बाड़ी योजना के तहत गौठान बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का दावा किया था।
अब सत्ता बदलने के बाद भाजपा सरकार ने गौधाम योजना के जरिए उसी मुद्दे को नए अंदाज में आगे बढ़ाने की कोशिश शुरू कर दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि
“छत्तीसगढ़ की राजनीति में गाय अब सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि सियासत की सबसे मजबूत रणनीति बन चुकी है।”

अगर सही लागू हुई तो बदल सकती है तस्वीर
सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित गौवंश को मिलेगा आश्रय किसानों की फसलों को होने वाला नुकसान कम होगा
सड़क हादसों में कमी आने की उम्मीद
गौ तस्करी पर लग सकती है रोक
लेकिन यह सब तभी संभव है जब योजना कागज से निकलकर जमीन पर उतरे।

गौ सेवा के नाम पर फर्जीवाड़े के आरोप
कुछ समय पहले गुंडरदेही क्षेत्र के विधायक कुंवर सिंह निषाद ने प्रदेश में गौ सेवा के नाम पर हो रही लूटपाट और फर्जीवाड़े को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे।
उन्होंने आरोप लगाया था कि
“गौ सेवा के नाम पर सरकारी पैसे का खेल चल रहा है।”
ऐसे में नई योजना पर अब सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
राजनीतिक गलियारों में बड़ा सवाल
क्या गौधाम योजना वास्तव में गौ सेवा और किसानों की राहत का रास्ता बनेगी?
या फिर यह भी घोषणाओं की राजनीति बनकर रह जाएगी?
प्रदेश की जनता अब घोषणाओं की नहीं, परिणामों का इंतजार कर रही है।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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