विनोद नेताम वरिष्ठ पत्रकार

विशेष खबरें

भारत की आत्मा, गांव की मिट्टी और किसानों के पसीने से सिंची इस पवित्र धरती को कभी महात्मा गांधी ने देश की असली पहचान बताया था। उनका साफ कहना था कि “भारत को समझना है तो गांवों में जाइए”लेकिन आज सवाल यह है कि क्या वही गांव, वही खेत, वही खलिहान और वही नदियां अब भी वैसी ही बची हैं?
देश की जीवनरेखा मानी जाने वाली मां गंगा, जो हिमालय से निकलकर करोड़ों लोगों की आस्था, कृषि और जीवन को सींचती है, आज खुद अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही है।

यह विडंबना नहीं, बल्कि व्यवस्था पर सीधा तमाचा है कि जिस नदी को “मां” कहकर पूजा जाता है, उसी को सबसे ज्यादा प्रदूषित भी हम ही कर रहे हैं।
और इस पूरी त्रासदी का सबसे कड़वा सच यह है कि गंगा को गंदा करने में केवल आम लोग नहीं, बल्कि राजनीतिक स्वार्थ, दिखावटी योजनाएं और खोखली घोषणाएं भी बराबर की भागीदार हैं। हर साल गंगा सफाई के नाम पर हजारों करोड़ रुपये पानी की तरह बहा दिए जाते हैं,लेकिन न गंगा साफ होती है, न व्यवस्था पारदर्शी।
कागजों में योजनाएं दौड़ती हैं, भाषणों में “मोदी की गारंटी” के नाम पर गंगा में जहाज चलाने के सपने दिखाए जाते हैं, लेकिन हकीकत में गंगा की धारा आज भी कचरे, गंदगी और लापरवाही से कराह रही है। सवाल यह है कि आखिर ये पैसा जाता कहां है? गंगा में या नेताओं के वादों के आसमान में?
अंधविश्वास, पाखंड और अव्यवस्थित धार्मिक प्रथाओं ने गंगा को नुकसान पहुंचाया है,यह सच है। लेकिन उससे भी बड़ा सच यह है कि इन सब पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी जिन राजनीतिक दलों और सरकारों की है, वही इस मुद्दे को सिर्फ वोट बैंक और दिखावे का जरिया बनाकर छोड़ देते हैं।
आज जरूरत है कड़े फैसलों की, न कि खोखले नारों की। जरूरत है ईमानदार नीति और सख्त अमल की, न कि फाइलों में बंद योजनाओं की। अगर सरकार सच में गंगा को बचाना चाहती है, तो उसे “प्रोजेक्ट” नहीं, “प्रतिबद्धता” बनाना होगा।
वरना आने वाले वक्त में इतिहास यही लिखेगा कि हमने अपनी ही मां को श्रद्धा के नाम पर गंदगी में डुबो दिया,और सत्ता सिर्फ तमाशा देखती रही।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed