विनोद नेताम वरिष्ठ पत्रकार
छत्तीसगढ़/बालोद/विशेष रिपोर्ट_
महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने सरकार का कदम, अधिकारियों को निगरानी के निर्देश।
छत्तीसगढ़ सरकार ने पंचायत व्यवस्था को पारदर्शी और महिला सशक्तिकरण को प्रभावी बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य शासन ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सरपंच के पति या अन्य परिजन पंचायत के कार्यों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करें।
सरकार के अनुसार, कई स्थानों से शिकायतें मिल रही थीं कि निर्वाचित महिला सरपंचों की जगह उनके पति (जिन्हें आम बोलचाल में ‘सरपंच पति’ कहा जाता है) पंचायत के निर्णय ले रहे हैं और शासकीय कार्यों का संचालन कर रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए अब शासन ने इस पर सख्त रुख अपनाया है।
निर्देश में कहा गया है कि पंचायत के सभी कार्य केवल निर्वाचित सरपंच और अधिकृत पदाधिकारियों द्वारा ही किए जाएंगे। यदि कहीं भी सरपंच पति या अन्य व्यक्ति के हस्तक्षेप की पुष्टि होती है, तो संबंधित सरपंच के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
प्रशासन ने जिला कलेक्टरों और जनपद पंचायत अधिकारियों को इस संबंध में सतर्क रहने और नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पंचायत बैठकों, दस्तावेजों और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

इस तरह की मामला अभी बालोद जिला के कई ग्राम पंचायतों में देखने और सुनने को मिल रहा है।
सरकार का मानना है कि यह कदम महिला प्रतिनिधियों को वास्तविक अधिकार देने और पंचायत राज व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगा। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है और इसे महिला नेतृत्व को सशक्त बनाने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
सरकार के इस सख्त रुख के बाद अब पंचायतों में ‘सरपंच पति’ की भूमिका पर लगाम लगने की उम्मीद है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

