रायपुर। राजधानी रायपुर में निराश्रित एवं घायल गौवंश तथा अन्य पशुओं के संरक्षण और उपचार को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता इलियास हुसैन (इमरान) ने तहसीलदार, नजूल शाखा, रायपुर को एक विस्तृत आपत्ति पत्र सौंपते हुए मांग की है कि ग्राम मेमोरियल खेल मैदान स्थित शासकीय भूमि का एक उपयुक्त हिस्सा गौशाला एवं आधुनिक पशु चिकित्सा केंद्र की स्थापना के लिए आरक्षित किया जाए।
यह आपत्ति उस सार्वजनिक सूचना के बाद दर्ज कराई गई है, जिसमें संबंधित शासकीय भूमि के प्रस्तावित आवंटन को लेकर आम नागरिकों से दावा एवं आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं। आवेदक का कहना है कि यदि वर्तमान प्रक्रिया के दौरान पशु संरक्षण संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में नहीं रखा गया, तो भविष्य में राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में गौशाला तथा आधुनिक पशु चिकित्सा सुविधाओं के लिए उपयुक्त सरकारी भूमि उपलब्ध कराना कठिन हो सकता है।
सार्वजनिक सूचना के बाद उठी मांग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रायपुर तहसील की नजूल शाखा द्वारा ग्राम मेमोरियल खेल मैदान स्थित खसरा क्रमांक 732, रकबा लगभग 2.5610 हेक्टेयर शासकीय भूमि के आवंटन की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। नियमानुसार इस प्रक्रिया के तहत आम नागरिकों से दावा एवं आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं।
इसी प्रक्रिया के अंतर्गत इलियास हुसैन (इमरान) ने अपनी आपत्ति प्रस्तुत करते हुए आग्रह किया है कि भूमि का एक निर्धारित हिस्सा गौशाला तथा आधुनिक पशु चिकित्सालय के लिए सुरक्षित रखा जाए, ताकि भविष्य में शहर को स्थायी पशु संरक्षण एवं उपचार केंद्र मिल सके।
निराश्रित पशुओं की बढ़ती संख्या बनी चिंता
आपत्ति पत्र में उल्लेख किया गया है कि रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में गाय, बैल तथा अन्य पशु खुले में घूमते दिखाई देते हैं। इनमें से अनेक पशु सड़क दुर्घटनाओं में घायल हो जाते हैं, जबकि कई बीमारियों से पीड़ित होने के बावजूद समय पर उपचार नहीं प्राप्त कर पाते।
आवेदक का कहना है कि वर्तमान में शहर में ऐसी कोई पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, जहां घायल एवं निराश्रित पशुओं का व्यापक स्तर पर उपचार, देखभाल और पुनर्वास किया जा सके। परिणामस्वरूप कई पशुओं की समय पर चिकित्सा न मिलने के कारण मृत्यु भी हो जाती है।
सड़क सुरक्षा से भी जुड़ा है मामला
आपत्ति पत्र में यह भी कहा गया है कि यह विषय केवल पशु कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर जनहित से भी जुड़ा हुआ है।
सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित पशु अक्सर यातायात बाधित करते हैं और कई बार गंभीर सड़क दुर्घटनाओं का कारण भी बनते हैं। यदि शहर में पर्याप्त क्षमता वाली गौशाला एवं पशु चिकित्सा केंद्र स्थापित किया जाता है तो इससे एक ओर पशुओं को सुरक्षित आश्रय मिलेगा, वहीं दूसरी ओर यातायात व्यवस्था में भी सुधार आने की संभावना है।
आधुनिक पशु चिकित्सा केंद्र की भी मांग
आवेदन में केवल गौशाला स्थापित करने की मांग नहीं की गई है, बल्कि आधुनिक सुविधाओं से युक्त पशु चिकित्सा केंद्र विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
सामाजिक कार्यकर्ता का कहना है कि प्रस्तावित केंद्र में घायल पशुओं का उपचार, शल्य चिकित्सा (सर्जरी), आपातकालीन चिकित्सा, पुनर्वास, टीकाकरण, संक्रमण नियंत्रण तथा दीर्घकालीन संरक्षण जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।
ऐसी व्यवस्था न केवल रायपुर बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के पशुओं के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है।
संविधान और भारतीय संस्कृति का दिया हवाला
अपने आवेदन में इलियास हुसैन ने भारतीय संस्कृति तथा संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों का उल्लेख करते हुए कहा है कि पशुओं का संरक्षण एवं संवर्धन राज्य की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि भूमि आवंटन जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय केवल विकास परियोजनाओं को ही नहीं, बल्कि पशु संरक्षण एवं जनहित से जुड़े दीर्घकालीन पहलुओं को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
उनका कहना है कि यदि वर्तमान में उचित निर्णय लिया जाता है तो भविष्य में शहर के लिए एक सुव्यवस्थित पशु संरक्षण तंत्र विकसित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने भी बताई आवश्यकता
पशु कल्याण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण पशुओं के प्राकृतिक आवास लगातार कम होते जा रहे हैं। ऐसे में शहरी क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से गौशालाएं, पशु अस्पताल और पुनर्वास केंद्र विकसित करना समय की आवश्यकता बन गया है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आधुनिक पशु चिकित्सा सुविधाएं विकसित होने से न केवल पशुओं के जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि नागरिकों को भी राहत मिलेगी।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखने की अपील
आवेदक ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया है कि यदि पूरी भूमि किसी अन्य उद्देश्य के लिए आवंटित कर दी जाती है, तो भविष्य में गौशाला एवं पशु चिकित्सालय हेतु उपयुक्त शासकीय भूमि उपलब्ध कराना अत्यंत कठिन हो जाएगा।
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि वर्तमान भूमि आवंटन प्रक्रिया के दौरान ही भविष्य की आवश्यकताओं का समुचित आकलन किया जाए।
उनका कहना है कि भूमि एक सीमित संसाधन है और एक बार किसी उद्देश्य के लिए आवंटित होने के बाद उसे पुनः सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराना आसान नहीं होता।
प्रशासन से नियमानुसार कार्रवाई की मांग
आवेदन के अंतिम भाग में सामाजिक कार्यकर्ता ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि दावा-आपत्ति प्रक्रिया के अंतर्गत प्रस्तुत उनकी आपत्ति पर नियमानुसार विचार किया जाए।
उन्होंने सक्षम प्राधिकारी से आग्रह किया है कि उपलब्ध तथ्यों, जनहित, पशु कल्याण तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भूमि का उपयुक्त भाग गौशाला एवं आधुनिक पशु चिकित्सा केंद्र के लिए आरक्षित करने पर निर्णय लिया जाए।
देशभर में बढ़ रही है पशु संरक्षण को लेकर जागरूकता
पिछले कुछ वर्षों में देशभर में पशु संरक्षण एवं पशु चिकित्सा सुविधाओं को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ी है।
कई राज्यों में आधुनिक गौ अभयारण्य, पशु अस्पताल, मोबाइल वेटरनरी यूनिट, पशु एम्बुलेंस सेवा तथा घायल पशुओं के पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रायपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में भी ऐसी सुविधाएं विकसित की जाती हैं तो इसका लाभ पशुओं के साथ-साथ आम नागरिकों को भी मिलेगा।
दावा-आपत्ति प्रक्रिया का महत्व
भूमि आवंटन से पहले दावा एवं आपत्ति आमंत्रित करने की प्रक्रिया प्रशासनिक पारदर्शिता का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
इस प्रक्रिया के माध्यम से नागरिकों, प्रभावित पक्षों तथा सामाजिक संगठनों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। यदि कोई सुझाव जनहित से जुड़ा होता है तो सक्षम अधिकारी उसका परीक्षण कर नियमानुसार निर्णय लेते हैं।
इसी प्रक्रिया के अंतर्गत प्रस्तुत इलियास हुसैन की आपत्ति अब प्रशासनिक परीक्षण के बाद विचाराधीन रहेगी।
अब प्रशासन के निर्णय पर टिकी निगाहें
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तहसीलदार एवं संबंधित सक्षम अधिकारी इस आपत्ति पर क्या निर्णय लेते हैं।
यदि प्रशासन इस मांग को उचित मानता है तो भविष्य में संबंधित शासकीय भूमि का एक हिस्सा गौशाला एवं आधुनिक पशु चिकित्सा केंद्र के लिए आरक्षित किया जा सकता है। वहीं यदि कोई अन्य निर्णय लिया जाता है तो वह उपलब्ध तथ्यों, नियमों तथा प्रशासनिक आवश्यकताओं के आधार पर होगा।
सामाजिक कार्यकर्ता का पक्ष
आवेदन प्रस्तुत करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता इलियास हुसैन (इमरान) ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी विकास कार्य का विरोध करना नहीं है।
उन्होंने कहा कि उनकी मांग केवल इतनी है कि भविष्य में बढ़ती पशु संरक्षण संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सरकारी भूमि का एक उपयुक्त हिस्सा गौशाला एवं आधुनिक पशु चिकित्सा केंद्र के लिए सुरक्षित रखा जाए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी आपत्ति पर जनहित और पशुहित दोनों के दृष्टिकोण से गंभीरता से विचार करेगा।
निष्कर्ष
राजधानी रायपुर में प्रस्तावित शासकीय भूमि आवंटन के बीच गौशाला एवं आधुनिक पशु चिकित्सा केंद्र के लिए भूमि आरक्षित करने की यह मांग अब चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर शहर के विकास से जुड़े विभिन्न प्रस्ताव हैं, वहीं दूसरी ओर निराश्रित एवं घायल पशुओं के संरक्षण और उपचार के लिए स्थायी व्यवस्था की आवश्यकता भी लगातार महसूस की जा रही है।
अब अंतिम निर्णय संबंधित प्रशासनिक प्राधिकारी द्वारा दावा-आपत्ति प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद लिया जाएगा। यह निर्णय न केवल भूमि आवंटन की दिशा तय करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि भविष्य की शहरी योजना में पशु संरक्षण, पशु चिकित्सा सुविधाओं और जनहित के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित किया जाता है।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

