विनोद नेताम (वरिष्ठ पत्रकार)
छत्तीसगढ़/उत्तरप्रदेश/ विशेष रिपोर्ट _
Ministry of Education के UDISE+ 2024-25 के अनुसार पूरे भारत में 50,000 से अधिक स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय उपलब्ध नहीं है, जबकि लगभग 70,000 स्कूलों में शौचालय या तो अनुपलब्ध हैं या कार्यशील नहीं हैं।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है।

यहां लगभग 7,000 स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय नहीं है और लगभग 11–12 हजार स्कूलों में शौचालय कार्यशील नहीं हैं।
स्थिति केवल यहीं तक सीमित नहीं है। अन्य राज्यों के आंकड़े भी बेहद गंभीर तस्वीर प्रस्तुत करते हैं-
छत्तीसगढ़ में 5,000 से अधिक स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं हैं, जबकि 8,000 से अधिक विद्यालयों में शौचालयों की स्थिति अत्यंत खराब है।
जम्मू-कश्मीर में 1,321 सरकारी स्कूलों में शौचालय नहीं है।
उत्तराखंड में 141 विद्यालयों में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं है।
राजस्थान में 14,000 से अधिक स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय उपलब्ध नहीं है।
मध्य प्रदेश में 14,072 स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं हैं, जिनमें लगभग 10,000 स्कूल पूरी तरह शौचालय विहीन हैं।
ये आंकड़े केवल संख्या नहीं हैं, बल्कि लाखों बेटियों की गरिमा, स्वास्थ्य और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा गंभीर प्रश्न हैं। जब विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी, तो छात्राओं की ड्रॉपआउट दर कैसे रुकेगी? मूत्र संक्रमण जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कैसे कम होगा? और “बेटी पढ़ाओ” जैसे नारे ज़मीन पर कैसे सफल होंगे?

हम @mygovindia और संबंधित राज्य सरकारों से मांग करते हैं कि मिशन मोड में सभी स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग एवं कार्यशील शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
बेटियों की शिक्षा पर केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस और सम्मानजनक बुनियादी व्यवस्था आवश्यक है। यही सच्चे अर्थों में विकास और समानता की पहचान है।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

