छह महीने पहले ही पद का वरदान! क्या ‘व्यवस्था बाबा’ चला रहे हैं संगठन का भविष्यफल?

विनोद नेताम (वरिष्ठ पत्रकार)
रायपुर/छत्तीसगढ़/विशेष रिपोर्ट _

कहते हैं राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं… लेकिन अगर पद मिलने से छह महीने पहले ही लेटरपैड छप जाए,तो मामला आस्था का है या व्यवस्था का – यह सवाल अब छत्तीसगढ़ के बालोद जिले मे और पुरे प्रदेश की सियासत में गूंजने लगा है।
देश की सबसे बड़ी पार्टी कहलाने वाली भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व पर इन दिनों सोशल मीडिया में घूम रहे एक कथित पत्र ने हलचल मचा दी है। पत्र की तारीखें देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो “जिला महामंत्री” जैसे महत्वपूर्ण पद का ज्ञान संबंधित पदाधिकारी को आधिकारिक घोषणा से छह माह पहले ही दिव्य आशीर्वाद के रूप में प्राप्त हो गया हो।
अब सवाल यह उठता है कि यह ज्ञान संगठन की आंतरिक प्रक्रिया से आया या किसी
“व्यवस्था बाबा” के आशीर्वाद से?सुशासन का चक्र या भविष्यवाणी का चक्र?
प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में “सुशासन” का दावा किया जा रहा है, लेकिन संगठन के भीतर यदि पदों का वितरण पहले से तय होकर लेटरपैड तक छप जाए, तो युवा कार्यकर्ताओं के मन में प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
जो युवा नेता दिन-रात मेहनत कर संगठन में पहचान बनाने का सपना देख रहे थे, वे अब सोशल मीडिया पर वायरल तारीखों को देखकर खुद से पूछ रहे हैं
“क्या हम मेहनत कर रहे थे, या सिर्फ औपचारिकता निभा रहे थे?”
रॉंग नंबर’ या ‘पहले से फिक्स नंबर’?
व्यंग्य की भाषा में कार्यकर्ता अब कहते सुने जा रहे हैं –*
“जिसे विधायक बनना हो, वह पहले उस व्यवस्था बाबा से मिल ले, जो छह महीने पहले ही पद बता देते हैं!”
कसम व्यवस्था बाबा की
अगर यह सच है तो संगठन की चयन प्रक्रिया से ज्यादा प्रभावशाली तो वह अदृश्य आशीर्वाद साबित हो रहा है।
युवा कार्यकर्ताओं में चर्चा
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि पद पहले से “आरक्षित” थे, तो फिर संगठनात्मक बैठकों, विचार-विमर्श और निष्ठा की कसौटी का क्या महत्व रह जाता है?
क्या यह सिर्फ औपचारिकता थी?
या फिर सोशल मीडिया पर घूम रही तारीखें किसी और कहानी की ओर इशारा कर रही हैं?
  (व्यंग्य में गंभीर सवाल)
यह पूरा प्रकरण भले ही व्यंग्य का विषय बन गया हो, लेकिन इसके केंद्र में एक गंभीर प्रश्न छिपा है?
क्या राजनीतिक दलों में पारदर्शिता और आंतरिक लोकतंत्र वास्तविकता है, या फिर निर्णय पहले से तय होकर सिर्फ घोषणा की प्रतीक्षा करते हैं?
जब तक “व्यवस्था बाबा” का रहस्य नहीं खुलता, तब तक प्रदेश की राजनीति में यह सवाल हवा में तैरता रहेगा।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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