विनोद नेताम वरिष्ठ पत्रकार
छत्तीसगढ़/बालोद/गुरुर/ विशेष रिपोर्ट_
एक तरफ सरकार मंचों से स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, “अमृतकाल” और “बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था” की बातें दिन-रात दोहराई जाती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों का ऐसा पर्दाफाश कर रही है कि सुनने वालों के भी होश उड़ जाएं। गर्मी के इस दौर में जहां मरीजों को राहत देने के लिए अस्पतालों में कूलर और पंखों की समुचित व्यवस्था होना चाहिए, वहीं गुरुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति देखकर ऐसा लगता है मानो मरीजों को इलाज नहीं बल्कि बदहाली का सामना करने के लिए छोड़ दिया गया है।
संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र माने जाने वाले गुरुर विकासखंड में स्थित इस अस्पताल का एक वीडियो अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वार्ड के भीतर मरीजों के बेड तो लगे हैं, लेकिन व्यवस्था ऐसी कि मानो यह कोई सरकारी अस्पताल नहीं बल्कि लापरवाही का प्रतीक बन चुका हो।
कहीं मच्छरदानियां फटी हुई हैं, कहीं कपड़ों और जालियों के सहारे मरीजों को मच्छरों से बचाने की कोशिश की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गर्मी लगातार बढ़ रही है, तब मरीजों को राहत देने के लिए कूलर जैसी बुनियादी सुविधा तक क्यों उपलब्ध नहीं है? क्या स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस अस्पताल की स्थिति पर कभी पड़ी ही नहीं, या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?
सरकार अक्सर विपक्ष से सवाल पूछती है कि आजादी के बाद इतने सालों में पिछली सरकारों ने जनता को क्या दिया। लेकिन अब वही सवाल आम नागरिक मौजूदा व्यवस्था से पूछ रहे हैं।
जब सरकार आपकी है, सिस्टम आपका है, तो फिर अस्पतालों की यह बदहाली आखिर किसकी जिम्मेदारी है?
गुरुर क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अस्पताल में आने वाले मरीज पहले से ही बीमारी और आर्थिक परेशानी से जूझते हैं, ऊपर से यहां की अव्यवस्था उनके दर्द को और बढ़ा देती है। मच्छरों और गर्मी के बीच मरीजों का इलाज किस तरह हो रहा होगा, इसका अंदाजा वीडियो देखकर ही लगाया जा सकता है।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि सरकार के दावों को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के कंधों पर है, क्या वे अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं? अगर नहीं, तो आखिर क्यों? और कब तक आम नागरिक इसी तरह बदहाली के बीच इलाज करवाने को मजबूर रहेंगे?
फिलहाल यह वीडियो स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान बनकर उभरा है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर संज्ञान लेते हैं या फिर यह मामला भी अन्य मुद्दों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
गर्मी में मरीज बेहाल, वार्ड से गायब कुलर – जालियों के सहारे इलाज।
सरकार के बड़े दावों के बीच गुरुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत उजागर,वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग पर उठे गंभीर सवाल
एक तरफ सरकार मंचों से बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और आधुनिक अस्पतालों के दावे करती नजर आती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती दिखाई दे रही है। बालोद जिले के गुरुर विकासखंड में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरुर की स्थिति इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। सी एम एच ओ डाक्टर सुनिल भारती ने खुद आकर मरीजों के लिए कुलर को चालू करवा, लेकिन चालू कुलरों में पानी तक नहीं भरा गया था। ऐसे मे जरा सोचिये गर्मी के इस मौसम में जहां मरीजों को राहत देने के लिए अस्पतालों में कूलर और पंखों की पर्याप्त व्यवस्था होना जरूरी है, वहीं गुरुर अस्पताल के वार्ड में मरीजों के लिए कूलर जैसी बुनियादी सुविधा भी नदारद बताई जा रही है। मरीजों को गर्मी और मच्छरों से बचाने के लिए जुगाड़ और जालियों का सहारा लेना पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार अस्पताल के अंदर की स्थिति का एक वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर आम नागरिकों के साथ-साथ क्षेत्र के लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि जब सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने का दावा करती है, तो फिर जमीनी स्तर पर ऐसी बदहाली क्यों दिखाई दे रही है।
🔹 अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी कहां है?
🔹 क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इस स्थिति की जानकारी नहीं?
🔹 अगर जानकारी है तो सुधार क्यों नहीं किया गया?
जनता की आवाज
“अस्पताल में मरीज इलाज के लिए आते हैं, लेकिन यहां की व्यवस्था देखकर लगता है कि मरीजों की परेशानी और बढ़ रही है। सरकार को इस पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।”
बड़ा सवाल
सरकार अक्सर पिछली सरकारों से पूछती है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में जनता को क्या दिया।
लेकिन अब आम जनता भी पूछ रही है

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

