गैस पर सरकार का दावा या ज़मीनी हकीकत?
सदन में “सब सामान्य”, गांव में सिलेंडर के लिए भटकती जनता।

विनोद नेताम वरिष्ठ पत्रकार

छत्तीसगढ़/बालोद/गुरुर/विशेष रिपोर्ट _
अंतरराष्ट्रीय हालात तेजी से बदल रहे हैं। मध्य-पूर्व में ईरान इजराइल और यूनाइटेड स्टेट के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया भर के पेट्रोलियम बाजार को अस्थिर कर दिया है। कच्चे तेल से लेकर एलपीजी गैस तक हर चीज़ की कीमतों में उबाल दिखाई दे रहा है।
दुनिया के कई देशों में इसका असर साफ दिखने लगा है। भारत के पड़ोसी बांग्लादेश और पाकिस्तान में पेट्रोलियम उत्पादों को लेकर हाहाकार जैसी स्थिति बन चुकी है।
लेकिन भारत में सरकार का दावा है,देश में कहीं भी गैस, पेट्रोल या डीज़ल की कोई कमी नहीं है।
सवाल यह है कि
अगर सब कुछ सामान्य है, तो देश के कई हिस्सों में अचानक गैस को लेकर बेचैनी क्यों बढ़ रही है?

इंडक्शन की अचानक बढ़ी बिक्री ने बढ़ाई शंका
हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में विस्फोटक बढ़ोतरी देखी गई है।
एक ही दिन में करीब 1.34 लाख इंडक्शन चूल्हे बिक गए
जबकि सामान्य दिनों में पूरे महीने में लगभग 1.8 लाख की बिक्री होती है
पिछले चार दिनों में 5 लाख से ज्यादा यूनिट बिकने की खबर सामने आई
कई बड़ी कंपनियों का स्टॉक खत्म हो गया।
यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है,यह उस डर का संकेत है जो आम नागरिक के मन में घर करने लगा है।
सदन में बवाल, जवाब में भरोसा
इस मुद्दे को लेकर संसद के दोनों सदनों में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष लगातार सरकार से सवाल पूछ रहा है कि अगर सब कुछ सामान्य है तो बाजार में यह बेचैनी क्यों है।
सरकार का कहना है कि देश में पेट्रोलियम पदार्थों की कोई कमी नहीं है और संकट की खबरें अफवाह हैं।
लेकिन सवाल यही है।
क्या केवल बयान देने से जमीन की सच्चाई बदल जाती है?

छत्तीसगढ़ से आई तस्वीर ने खड़े कर दिए सवाल
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुरुर विकासखंड के ग्राम अरमरीकला में स्थित इंडियन गैस एजेंसी के बाहर जो दृश्य सामने आया, उसने सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर दिए।
स्थानीय लोगों के मुताबिक उन्हें गैस सिलेंडर रिफिल कराने के लिए कई-कई दिन चक्कर लगाना पड़ रहा है।

वीडियो में भी दिखाई देता है कि लोग गैस एजेंसी के बाहर अपनी समस्या बताते नजर आते हैं। उनका कहना है कि पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से सिलेंडर मिलने में परेशानी हो रही है।
यह तस्वीर केवल एक गांव की नहीं है,यह उस चिंता की झलक है जो धीरे-धीरे लोगों के मन में पनप रही है,असली सवाल अब भी बाकी है।
सरकार का दावा,देश में कहीं कोई संकट नहीं।
लेकिन बाजार में बढ़ती घबराहट, इंडक्शन की अचानक बढ़ी बिक्री और कई जगहों से सामने आ रही शिकायतें एक अलग कहानी कहती हैं।
यानी सवाल अब भी वही है,क्या सब कुछ वास्तव में सामान्य है?
या फिर हालात को सामान्य बताने की कोशिश की जा रही है?
क्योंकि इतिहास गवाह है,जब जनता गैस के सिलेंडर के लिए परेशान होने लगे,
तो राजनीतिक गलियारों में हलचल होना तय है।
और आज देश का आम नागरिक बस इतना ही पूछ रहा है,सच्चाई क्या है?
सरकार का भरोसा… या जमीन की हकीकत?

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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