जंगली सुअर के हमले से दहला भानपुरी: घायल दंपत्ति धमतरी रेफर, वन विभाग गहरी नींद में।

विनोद नेताम वरिष्ठ पत्रकार

छत्तीसगढ़/बालोद/गुरुर/ विशेष रिपोर्ट_
बालोद जिले में लगातार घटते जंगल और बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की भयावह तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। गुरूर विकासखंड के ग्राम भानपुरी में खेत से लौट रहे एक किसान दंपत्ति पर जंगली सुअर ने अचानक हमला कर दिया, जिसमें दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना ने न केवल ग्रामीणों को दहशत में डाल दिया है, बल्कि वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

बताया जा रहा है कि खेत से लौटते समय अचानक सामने आए जंगली सुअर ने किसान दंपत्ति पर बर्बर हमला कर दिया,जान बचाने की जद्दोजहद में घायल पति-पत्नी ने भी हिम्मत नहीं हारी और बहादुरी से मुकाबला करते हुए जंगली सुअर को ही ढेर कर दिया।

यह घटना इस बात की गवाही देती है कि अब गांवों में किसान अपनी सुरक्षा के लिए खुद ही मोर्चा संभालने को मजबूर हो चुके हैं।
घटना के बाद ग्राम भानपुरी के युवा सरपंच डाकेश साहू ने मानवता का परिचय देते हुए तुरंत निजी वाहन की व्यवस्था की और घायल दंपत्ति को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र गुरूर पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए धमतरी रेफर कर दिया।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वन विभाग कर क्या रहा है?
बालोद जिले में हाथी, बंदर, जंगली सुअर जैसे वन्य जीवों का गांवों में घुसकर फसलों और लोगों को नुकसान पहुंचाना अब आम बात हो चुकी है। आए दिन ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं,लेकिन वन विभाग की भूमिका हर बार “घटना के बाद कागजी कार्रवाई” तक ही सीमित नजर आती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब जंगलों की अंधाधुंध कटाई हो रही है और वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास खत्म हो रहा है, तब इन जानवरों का गांवों की ओर रुख करना स्वाभाविक है। मगर इन परिस्थितियों से निपटने के लिए न तो कोई ठोस योजना दिखाई देती है और न ही समय रहते कोई प्रभावी कदम उठाए जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी या तो कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं या फिर उनका पूरा ध्यान जंगलों की सुरक्षा से ज्यादा अवैध लकड़ी कारोबारियों से वसूली में लगा हुआ है। नतीजा यह है कि अब वन्य जीवों के आतंक से गांवों में दहशत का माहौल बनता जा रहा है।
भानपुरी की यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है,अगर समय रहते वन्यजीव प्रबंधन और जंगलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में ऐसे हमले और भी खतरनाक रूप ले सकते हैं।
अब देखना यह होगा कि इस घटना के बाद वन विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर हर बार की तरह यह मामला भी कागजों में दफन होकर रह जाएगा।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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