तपती दोपहर में वृक्षारोपण,गुरूर ब्लॉक की धनोरा पंचायत का ‘अनोखा कारनामा’ 30–35 डिग्री तापमान में मजदूरों से लगवाए जा रहे पौधे, ग्रामीण बोले, “बरसात का काम गर्मी में क्यों?”

विनोद नेताम वरिष्ठ पत्रकार

छत्तीसगढ़/ बालोद/गुरुर/ विशेष रिपोर्ट _
भीषण गर्मी के बीच गुरूर ब्लॉक के ग्राम पंचायत धनोरा से सामने आई एक तस्वीर ने पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी है,जहां एक तरफ तापमान 30 से 35 डिग्री तक पहुंच चुका है और लोग दोपहर में घर से निकलने से भी बच रहे हैं,वहीं दूसरी ओर पंचायत द्वारा तेज धूप में मजदूरों से वृक्षारोपण कराया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि गांव के बटालियन के पास स्थित राजस्व भूमि पर दोपहर के वक्त मजदूरों से पौधे लगवाए जा रहे हैं। आमतौर पर वृक्षारोपण का सही समय बारिश का मौसम माना जाता है, ताकि पौधों को पर्याप्त नमी मिल सके और उनके जीवित रहने की संभावना बनी रहे।

लेकिन धनोरा पंचायत में इस वैज्ञानिक नियम को दरकिनार करते हुए गर्मी की चिलचिलाती दोपहर में ही पौधे लगाए जा रहे हैं।
इस अजीबो-गरीब पहल ने ग्रामीणों को हैरानी में डाल दिया है और पंचायत की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों में चर्चा और सवाल
जब खेतों में काम करना मुश्किल है तो वृक्षारोपण क्यों?
बारिश में होने वाला काम गर्मी में कराने की जल्दबाजी किस बात की?
क्या योजनाओं का बजट जल्दी खर्च दिखाने का दबाव है?
अगर पौधे सूख गए तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पौधों को उचित मौसम और देखभाल नहीं मिली तो उनका जीवित रह पाना बेहद मुश्किल है।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया
“जब इस मौसम में खेतों में काम करना भी मुश्किल हो जाता है, तब ऐसे समय में वृक्षारोपण कराना समझ से परे है। बरसात में लगाए जाने वाले पौधे अगर गर्मी में लगाए जाएंगे तो उनके सूखने का खतरा भी बना रहेगा।”
सवालों के घेरे में पंचायत की कार्यशैली
गांव में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि कहीं योजनाओं के बजट को जल्द खर्च दिखाने या कागजों में काम पूरा करने की जल्दबाजी में यह वृक्षारोपण तो नहीं कराया जा रहा।
क्योंकि यदि पौधे गर्मी में ही सूख गए तो पूरा अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा और सरकारी पैसे का भी सवाल खड़ा होगा।
“जब धरती तप रही है, तब पौधे लग रहे हैं,यह हरियाली का अभियान है या कागजी हरियाली?”
अब बड़ा सवाल
जानकार और वन विभाग भी वृक्षारोपण के लिए बरसात का मौसम सबसे उपयुक्त मानते हैं, तो फिर भीषण गर्मी में यह अभियान क्यों चलाया जा रहा है?
अब देखना यह होगा कि तपती धूप में लगाए गए ये पौधे कितने दिन तक जिंदा रह पाते हैं और पंचायत प्रशासन इस पूरे मामले में क्या सफाई देता है। फिलहाल धनौरा पंचायत का यह वृक्षारोपण अभियान पूरे क्षेत्र में चर्चा और सवालों का विषय बना हुआ है।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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