विनोद नेताम
छत्तीसगढ़ | विशेष रिपोर्ट_
सीताफल,बोईर, ईमली के बाद अब गंगा ईमली की बारी
गर्मी का मौसम शुरू होते ही छत्तीसगढ़ के स्थानीय बाजारों में एक बार फिर देसी मौसमी फलों की आमद बढ़ने लगी है। प्रदेश में बेहद लोकप्रिय यह पारंपरिक फल इन दिनों गांव-गांव से शहरों तक पहुंच रहा है, जिससे बाजारों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि ग्रामीण विक्रेता बड़ी मेहनत से इस मौसमी फल को छांटकर छोटे-छोटे ढेरों में सजाकर बिक्री के लिए तैयार कर रहे हैं।
हर साल गर्मी के मौसम में इस फल का इंतजार लोगों को बेसब्री से रहता है। स्वाद, ताजगी और देसी पहचान के कारण यह फल बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की पसंद बना रहता है। बाजार में इसकी आमद शुरू होते ही खरीदारों की भीड़ उमड़ने लगती है, क्योंकि यह सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि गर्मी में शरीर को ठंडक और पोषण भी देता है।
ग्रामीण अंचलों से आने वाले छोटे व्यापारी और महिलाएं इस फल की बिक्री से अच्छी आमदनी भी अर्जित करती हैं। स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। पारंपरिक स्वाद और मौसमी मांग के चलते यह फल हर वर्ष गर्मियों में बाजार की शान बन जाता है।
इस बार भी उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इसकी आवक और बढ़ेगी तथा छत्तीसगढ़ के बाजारों में देसी स्वाद की यह बहार लोगों को खूब लुभाएगी।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

