विनोद नेताम
नई दिल्ली/राजस्थान/ विशेष रिपोर्ट_
25–30 दिन काम करता है किसान?यह बयान खेतों की मिट्टी नहीं, सत्ता के एसी कमरों की सोच बताता है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का यह कथन कि “देश का किसान सिर्फ 25–30 दिन काम करता है” न सिर्फ हैरान करने वाला है, बल्कि उस किसान समाज के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है, जो साल के 365 दिन खेत, मौसम और कर्ज से जूझता है।
भारत का किसान कोई दफ्तर का कर्मचारी नहीं, जो तय घंटों में काम कर लौट जाए। वह तपती दोपहरी में खेत जोतता है, कड़कड़ाती ठंड में सिंचाई करता है, मूसलाधार बारिश में फसल बचाने की जद्दोजहद करता है। धरती का सीना चीरकर अन्न उगाने वाला किसान तब भी नहीं रुकता, जब ओलावृष्टि उसकी महीनों की मेहनत मिनटों में तबाह कर देती है।
विडंबना देखिए,एक ओर मंचों से किसानों की आय दोगुनी, चौगुनी, आठ गुना बढ़ने के दावे किए जाते हैं, दूसरी ओर हकीकत यह है कि किसान आज भी खाद, बीज, डीजल, कीटनाशक और बिजली के बढ़ते दामों से कराह रहा है। उपज का उचित मूल्य नहीं, MSP पर स्पष्ट गारंटी नहीं, कर्ज का बोझ अलग। जिन खेतों से देश की थाली भरती है, वही खेत आज कॉरपोरेट कब्जों और भूमि अधिग्रहण के निशाने पर हैं।
सरकारें आंकड़ों में समृद्धि दिखाती हैं, लेकिन गांवों में किसान आत्महत्या की खबरें अब भी रुक नहीं रहीं। क्या उन मृत किसानों की चिताओं की राख में भी “25–30 दिन काम” का हिसाब खोजा जाएगा?
यह बयान केवल शब्दों की चूक नहीं, बल्कि उस मानसिक दूरी का प्रमाण है जो सत्ता और खेत के बीच बढ़ चुकी है। किसान को आंकड़ों से नहीं, उसकी फटी हथेलियों, सूखी आंखों और गिरवी रखी जमीनों से समझना होगा।
देश का किसान 25–30 दिन नहीं, हर दिन काम करता है और अफसोस, उसके हिस्से में आज भी सम्मान से ज्यादा उपेक्षा ही आती है।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

