विनोद नेताम (वरिष्ठ पत्रकार)
छत्तीसगढ़/बालोद/लोहारा/दल्ली राजहरा_
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के डौंडीलोहारा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तूएगोंदी में कुछ वर्ष पूर्व घटित घटना आज भी आदिवासी समाज के जख्मों को कुरेद रही है। सवाल यह है कि क्या यह मामला एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार के लिए गले की फांस बनने जा रहा है?
आदिवासी समाज यह प्रश्न पूछने को विवश है कि आखिर निर्दोष ग्रामीणों पर हुए कथित जानलेवा हमलों के आरोपियों को लेकर सरकार का रुख इतना नरम क्यों दिखाई देता है? क्या सत्ता का संरक्षण कुछ लोगों को कानून से ऊपर खड़ा कर देता है? क्या राजनीतिक समीकरणों की आड़ में न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है?
तूएगोंदी जिस क्षेत्र में स्थित है,वह संविधान की पांचवी अनुसूची के तहत प्रस्तावित संरक्षित क्षेत्र है – ऐसा क्षेत्र जहां ग्रामसभा की अनुमति के बिना कोई बाहरी हस्तक्षेप वैधानिक रूप से स्वीकार्य नहीं है।

ऐसे में यदि पारंपरिक रीति-रिवाजों और पूजा-अनुष्ठान करने वाले आदिवासियों पर हमले हुए,तो यह केवल कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं का भी प्रश्न है।
मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है, और आदिवासी समाज को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। लेकिन निर्णय आने से पहले जिस प्रकार की राजनीतिक बयानबाज़ी और अंदरखाने की रणनीति की चर्चाएं सामने आ रही हैं, वे अनेक सवाल खड़े करती हैं।
विशेष रूप से जब राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं, तब अपेक्षा और भी बढ़ जाती है।
उनसे यह सवाल स्वाभाविक रूप से पूछा जा रहा है कि क्या वे इस संवेदनशील मुद्दे पर निष्पक्ष और कठोर रुख अपनाएंगे? या फिर यह मामला भी राजनीतिक संतुलन की भेंट चढ़ जाएगा?
इससे पहले आदिवासी पहचान और धार्मिक संबद्धता को लेकर दिए गए बयानों पर भी विवाद खड़ा हो चुका है। ऐसे में तूएगोंदी प्रकरण सरकार की नीयत, नीति और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता की अग्निपरीक्षा बन चुका है।
अब देखना यह है कि क्या सरकार पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच का मार्ग अपनाती है, या फिर यह मामला आने वाले समय में एक बड़े राजनीतिक तूफान का कारण बनता है।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

