विनोद नेताम

छत्तीसगढ़|विशेष रिपोर्ट_

रायपुर की लेट नाइट पार्टी का वायरल वीडियो कोई मामूली घटना नहीं है। यह सिर्फ एक क्लब की चारदीवारी के भीतर हुई हलचल नहीं, बल्कि उस बदलते छत्तीसगढ़ की तस्वीर है, जहां “विकास” के नाम पर अनुशासन और संस्कृति को धीरे-धीरे किनारे किया जा रहा है।
सवाल सीधा है और चुभता हुआ भी, क्या अब नियम सिर्फ आम लोगों के लिए ही रह गए हैं? क्या रात के अंधेरे में कानून भी सो जाता है? और अगर ऐसा है, तो फिर प्रशासन की भूमिका क्या रह जाती है,मूकदर्शक की या साझेदार की?
एक समय था जब छत्तीसगढ़ अपनी सादगी, शांति और सामाजिक संतुलन के लिए जाना जाता था। लेकिन आज वही धरती शोर, शराब और दिखावे की नई संस्कृति की गिरफ्त में नजर आ रही है। क्लबों में रातभर चलने वाली पार्टियां, खुलेआम नियमों की धज्जियां और जिम्मेदारी का पूरी तरह से अभाव, यह सब मिलकर एक खतरनाक संकेत दे रहे हैं।
यह बहस “बाहरी बनाम स्थानीय” की नहीं है। बाहर से लोग आएं, व्यापार करें, संस्कृति का आदान-प्रदान हो, इसमें कोई बुराई नहीं। लेकिन अगर इसके साथ कानून तोड़ने की मानसिकता और बेलगाम “ऐश” की प्रवृत्ति भी आयात हो रही है, तो यह सीधा-सीधा सामाजिक संतुलन पर हमला है।
सबसे चिंताजनक पहलू है नई पीढ़ी पर इसका असर। जब युवा यह देखते हैं कि नियम तोड़ना ही स्टेटस बन गया है, जिम्मेदारी का कोई मतलब नहीं और प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है,तो फिर उनसे अनुशासन की उम्मीद कैसे की जाए? क्या हम उन्हें यही सिखा रहे हैं कि “जितना बड़ा शोर, उतनी बड़ी पहचान”?
और यहां सरकार की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जब खुद नीतियां शराब बिक्री को बढ़ावा देने पर केंद्रित हों, जब राजस्व के नाम पर हर सीमा पार की जा रही हो, तो फिर युवाओं के बिगड़ते हालात पर चिंता जताना कहीं न कहीं खोखला लगता है। अगर सरकार खुद आग को हवा देगी, तो धुआं उठना तय है।
खुली सड़कों पर नियम टूटे, क्लबों में मर्यादा बिखरे और जिम्मेदारी कहीं नजर न आए ,तो फिर फर्क ही क्या रह जाएगा हमारे शहरों और बड़े महानगरों के बीच? क्या हमने विकास का मतलब सिर्फ “नाइट लाइफ” और “हाई प्रोफाइल दिखावा” मान लिया है?

छत्तीसगढ़ बदल रहा है,इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन यह बदलाव किस दिशा में जा रहा है, यह सवाल अब टालने का नहीं, जवाब मांगने का समय है। क्योंकि अगर आज भी हम चुप रहे, तो आने वाली पीढ़ियां हमसे यही पूछेंगी,“जब सब कुछ बदल रहा था, तब आप कहां थे?”
यह सिर्फ एक वीडियो नहीं, एक चेतावनी है। अब फैसला समाज को करना है,हमें चमक चाहिए या चरित्र।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *